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अपने आलिशान पेंटहाउस के बाहर वे दोनों खड़े थे। ऊँची काँच की दीवारों वाली वह इमार...
क्या रुद्र उस 'सत्य' को झेल पाएगा जिसे महागुरु 'कैद' कह रहे थे?...
यह सिद्धांत प्रभजोत सिंह नागरा द्वारा प्रस्तुत किया गया है || सन् 2026 इंडिया...
बैंगलोर, एक ऐसा शहर जो कभी पूरी तरह सोता नहीं है। दूर सड़क पर किसी ट्रक के चलने...
तुम ही तो हो मेरी सासों से जो मुझे पहचाने, मेरी खामोशी जो समझे , तुम ही तो हो....
उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव सीतामढ़ी के पास बसे एक साधारण से गाँव में एक लड़का...
कमरा हल्की धूप से भरा हुआकुर्सी पर रात से जलता टेबल लैंप अब भी टिमटिमा रहा था।श्...
अध्याय: आस्था और प्रकृति का अटूट बंधन प्रस्तावनाभारत एक ऐसा देश है जहाँ प्रकृति ...
दृश्य १ – मुंबई पोर्ट टर्मिनल | रात २:१३ बजेबाहरी – मुंबई पोर्ट कंटेनर यार्ड – र...
भाग 1शाम ढल रही थी। आसमान में हल्की सुनहरी रोशनी फैली हुई थी, जैसे दिन रात को वि...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर। Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला AI डेवलपर। Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंज...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
अंधेरा... सिर्फ घना अंधेरा और चारों तरफ खून की गंध। यह एक विशाल साम्राज्य की कालकोठरी, जहाँ की दीवारों पर कभी सोने की नक्काशी होती थी, आज वहां सिर्फ लोहे की जंजीरों की खनखनाहट थी।...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
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