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त्रिजला कहती है--> आपकी आञा हो तो इसे अभी यहां से कुंभ्मन के पास लेकर चलुं ? मात...
एक दिन का बॉयफ्रेंड मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी।मेट्रो स्टेशन के बाहर लोग...
काव्या पुरानी बात। लेकिन तेरा राज़..." झगड़ा चरम पर। अनन्या ने चाय फोड़ दी। आर्य...
Human Mindset (मानव मन की शक्ति)मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी शारीरिक शक्ति नहीं...
Vedanta 2.0 : H₂O जीवन जीना ही ईश्वर है अज्ञात अज्ञानी विषय-सूची प्रारंभिक ख...
साल 1540 की एक ठंडी सुबह। अरावली की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला अप...
VULTURE: बंधन, भरोसा और बगावतसीन 1 – रात का शहर, टूटी हुई खामोशीतेज़ हवा।ऊँची इम...
फिल्म समीक्षा :_ सूबेदार बालू माफिया और भ्रष्ट सिस्टम का सच बताती बेजोड़ फिल्म &...
लेखक -एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेश दूरभाष +917648959825यह कहानी कुछ ही दिन पहल...
पाँच महीने कैसे पंख लगाकर उड़ गए… किसी को पता ही नहीं चला। उधर हवेली में… एक दिन...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं अब 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर घूर-घूरकर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी...
राज्य की शाम हमेशा शांत हुआ करती थी, लेकिन आज हवा में अजीब-सी घबराहट थी। सूरज की लाल किरणें पहाड़ों के पीछे डूब रही थीं, और किले की ऊँची दीवारों पर जली मशालों की रोशनी लहरों की त...
माही आज पहले दिन जब ऑफिस पहुँची तो सबसे पहले उसकी मुलाकात उस लड़के से हुई जिसकी तस्वीर कुछ दिन पहले ही उसके घर आई थी। उनके रिश्ते की बातें भी दोनों के माता-पिता के बीच चल रही थीं।...
अटारी में धूल के कण हवा में तैर रहे थे, मानो समय के साथ उलझी कोई पुरानी कहानी बुन रहे हों। नाना जी का बंगला, जो कभी किताबों की सौंधी खुशबू, कविताओं की गूंज, और ज्ञान की चर्चाओं से...
"छाया की जिंदगी का एक ही सपना था—विशाल का प्यार। लेकिन जब उसका सपना बिखर जाता है, तो उसके साथ टूटती है उसकी मोहब्बत की दीवानगी। उसी पल उसमें जन्म लेता है आत्मसम्मान और नारी-शक्...
"तमन्ना को कभी नहीं पता चला कि उसकी ज़िंदगी कब सुबह से शाम और शाम से रात में बदलती जाती है।गली के खेल, माँ की व्यस्तता और पिता की चुप्पी के बीच वो बस एक बच्ची थी—जिसके सपनों की...
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