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: : प्रकरण -50 : : " बडे पापा! एक खुश खबर हैं! सुनकर...
---## **सीरीज: "शून्य का सन्नाटा 3: घर का भेदी" (The Internal Collapse)**### **ए...
ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस दे उपरोक्त देशी कहावत मैंने दो अवसरों पर सुनी थी, द...
अंधेरा इतना अभेद्य और घना था कि आर्यन को अपनी आँखों के सामने अपनी ही हथेलियाँ दि...
दादासाहेब राख से प्यार नहीं करते थे; वे राख से होने वाली तबाही की पूजा करते थे।...
अप्सराहरुको गाथा नमस्कार सरस्वती मातालाई, शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई। स्वर्गको...
लेखक -एसटीडी मौर्य ️दूरभाष +917648959825कटनी मध्य प्रदेश (भारत )एक बार मैं ट्रेन...
विष्णु भक्त प्रह्लाद का जन्मरानी कयाधू ने अब तक तीन पुत्रों को जन्म दिया था, जिन...
अध्याय 5: अध्याय 5: पहली हत्या का इनाम: नाग-मानव जनजाति के पुजारी की भर्ती का स्...
एपिसोड 7: भरोसा टूटे?बंगला फिर शांत था, लेकिन हवा में तनाव। अनन्या सोफे पर बैठी,...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
विराज मल्होत्रा = उम्र: 28 सालविराज शहर का सबसे कामयाब लेकिन सबसे "रूड" (Rude) बिजनेस टाइकून है। वह अनुशासन का पक्का है और उसे देरी बिल्कुल पसंद नहीं। वह अक्सर गहरे रं...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
मुंबई का ताज महल पैलेस होटल आज रात किसी सपने की तरह चमक रहा था। ग्रैंड बॉलरूम को इतना शानदार सजाया गया था कि लग रहा था कोई बॉलीवुड की बड़ी फिल्म की शूटिंग चल रही है। छत से लटके क्र...
सुबह का वक्त था। हल्की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस के पेड़ों से टकराकर गुजर रही थी। गेट के बाहर हमेशा की तरह भीड़ लगी हुई थी — कुछ स्टूडेंट्स जल्दी में, कुछ दोस्ती में, कुछ सिर्फ दिखावे म...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
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