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----------------------- अंजाम कुछ भी हो। जानता हु, "शांत लहरें कब तूफान का रुखल...
व्यवस्था जंगल में शेर ने एक फैक्ट्री डाली... उसमें एकमात्र काम करने वाली चींटिया...
एक घना जंगल जहां हरे भरे पेड़ों की कमी नहीं है और जंगली जानवरों की भी कमी नहीं ह...
हेल्लो और नमस्कार! मैं राहुल नर्मदे, आज कोई कहानी लेकर नहीं बल्कि आपसे मिलने...
रात का सन्नाटा गहरा और भयानक था। हवा में अजीब सी ठंडक थी, जो हड्डियों तक सिहरन प...
Ch 3 - शीधांश और आरवी की पहली मुलाकात पीछले भाग में आपने पढ़ा.....सोना उसकी बात...
वही दूसरी ओर स्टेज़ पर होस्ट announce करता हैं कि -"पायल! अब आप शुरू कर सकती हैं...
अब तक हम ने पढ़ा की लूसी और रोवन की शादी हो चुकी थी। जैसा के लूसी ने प्लान किया...
एक बार मिथिला के राजदरबार में दिल्ली का एक पहलवान आया।वह सात फुट ऊँचा भारी डील-ड...
जतिन और मैत्री दोनो समझदार थे... रिश्तो और एक दूसरे की भावनाओ के प्रति जिम्मेदार...
जिज्जी….. हमें अपने पास बुला लो…” बस ये एक वाक्य कहते-कहते ही कुंती की आवाज़ भर्रा गयी थी. और इस भर्राई आवाज़ ने सुमित्रा जी को विचलित कर दिया. मन उद्विग्न हो गया उनका, जैसा कि हमे...
के हर गली, कस्बे और झोपडी मे मुझे ऐसे लोगोको बदनामी, जिल्लत और रुसवाई के सिवा और कुछ नही मिलता । नफरत के निगाहो से देखी जाने वाली ईन “समलैङिगक समुदाय” के लोगोको अपमान बेईजती, तिरस...
वैसे तो राकेश लगभग हर साल गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर मिर्जापुर जाता था पर इस बार दो साल बाद आया था तो मन कुछ ज्यादा ही खुश था, मामा मामी और सभी बच्चे किसी शादी में गए थे घर...
प्रकृति का अद्भूत नियम है, "जिसनें जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है"। कहा जाता है कि इंसान हो या जानवर, "पैदा होने से पहले उसकी मृत्यु निश्चित कर दी जाती है। उसे कब...
( बंधन जन्मोंका ) ( उपन्यास.... यह एक लव स्टोरी हैं । नायक और नायिका के दों जन्मों की कथा आलेखित की गई हैं। । कहानी पांच प्रकरणमें विभाजित हैं।यह कहानी मेरी अपनी रचना हैं,...
, बचपन के आँसूमैं आठ वर्ष की थी जब मेरे बाबा बीमार पड़ गए वे काम नहीं काम कर पाते थे ।क्योंकि वह चल नही पाते थे। और में भी काम नहीं कर पाती थी क्योंकि मै...
आज फिर, खिड़की पर बैठी, रिमझिम बारिश में खेलते बच्चों को निहारती, सुहानी कुछ सोचने लग पड़ी थी । वक़्त गुज़रते देर कहाँ लगती है ?? उसकी शादी को आज पूरे 27 साल हो चुके थे,पर लगता है जैसे...
फ़ुरसत का दिन था दोपहर भर के बाद करीब शाम के तीन सवा तीन का वक्त होगा मैं दोस्तों के साथ गपशप करके घर लौट ही रहा था कि अचानक से मेरी बाइक से आगे एक तेज़ से चली आ रही नब्बे की स्पीड...
अध्याय - एकॐ भूर् भुवः स्वःतत् सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्…बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।इन श्लोको के साथ गुर...
Copyright © Anil Sainger 2017 All rights reserved This is a work of fiction. Names, characters, places and incidents are either the product of the author’s imagination or are used...
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