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Featured Books

​मेरा प्यार By mamta

दरिया, परिंदे और वो अजनबी

​अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...

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प्रेम न हाट बिकाय By Pranava Bharti

कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...

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भक्त प्रह्लाद By Siya Kashyap

पौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा का अत्यंत महत्त्व है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, ज...

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Vulture By Ravi Bhanushali

शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान
विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर”
[दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या]
लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है...

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सौदे का सिन्दूर By Anil singh

हॉस्पिटल में आईसीयू के बाहर की हवा भारी थी, जिसमें फिनाइल की तीखी गंध और वेंटिलेटर की 'बीप-बीप' करती डरावनी आवाज़ मिली हुई थी। सान्वी वर्मा के हाथ में पकड़ा हुआ वह बीस लाख...

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दीवाने की दिवानियत By kajal jha

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट
दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...

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Agent Tara By Pooja Singh

मुंबई कभी नहीं सोती.
रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह.
आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी.
दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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ঝরাপাতা By Srabanti Ghosh

সন্ধ্যা নামার ঠিক আগের এই সময়টা খুব প্রিয় মণিকার। যখন স্কুল কলেজে পড়ত, এই সময়ে এককাপ চা নিয়ে মায়ের সঙ্গে বসত গোল বারান্দায়। মা বসতে চাইত না, সন্ধে দিতে হবে, জলখাবার করতে হবে,...

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अधुरा वादा एक साया By kajal jha

सन्नाटे की गूँज
माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...

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मुंबई कभी नहीं सोती.
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माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...

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