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एपिसोड 8: गिल्ट, घाव और अनसुनी चीखेंकमरे की खामोशी ज़ोया को काटने को दौड़ रही...
૩૧. અણધાર્યો અકસ્માતઆદિત્ય રૉયે પ્રોફેસર મિશ્રાને ફોન કરી બધી વિગતો જણાવી. પ્રોફ...
जब भूपेंद्र को पता चला कि वंशिका की तबीयत खराब है, तो वे परेशान तो हुए, लेकिन उस...
चतूर कहता है ----> आलोक क्यों ना बाईक को कुछ दुर और अंदर ले जाकर दैखते है़ ? आलो...
Chapter 7: Code and ConsequencesThe spark from Mira’s touch didn’t fade; it smol...
आर्यन ने साबित कर दिया था. वह नामर्द था. मर्द की तरह हरकते कर नहीं सकता...
भाग 1रात का समय था। शहर की चमकती हुई सड़कों के ऊपर काले बादल छाए हुए थे, जैसे आस...
अध्याय 2 पिंजरे में पहली रातकाव्या ने अपने हाथ...
સૂબેદાર- રાકેશ ઠક્કર અનિલ કપૂર બોલિવૂડનો એવો જાદુગર અભિનેતા છે જેની ઉંમર...
10 -- विद्यापीठ पास होने के...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर” [दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या] लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
সন্ধ্যা নামার ঠিক আগের এই সময়টা খুব প্রিয় মণিকার। যখন স্কুল কলেজে পড়ত, এই সময়ে এককাপ চা নিয়ে মায়ের সঙ্গে বসত গোল বারান্দায়। মা বসতে চাইত না, সন্ধে দিতে হবে, জলখাবার করতে হবে,...
અંધારું હજી છવાયેલું હતું ઠંડી પણ પુરબહારમાં હતી.. સિડનીની સુમસામ સડકો.. નિઃશબ્દ સ્ટ્રીટ..હજી સવારના છ વાગ્યા હતાં સિટીમાં જોબ કરવા જનારા તૈયાર થઇ ઘરની બહાર નીકળી રહ્યા હતાં. સ...
सन्नाटे की गूँज माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...
Rain slicked streets reflected the city lights like shattered diamonds. In a sleek black limousine, Adrian Knight sat silently, fingers tapping the polished leather armrest. His mi...
मुंबई कभी नहीं सोती. रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह. आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी. दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी...
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