Ishq - 9 in Hindi Short Stories by om prakash Jain books and stories PDF | इश्क. - 9

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इश्क. - 9

शेखर सिम्मी को उसके घर बाइक से पहुँचाने जाता है।सिम्मी के घर वाले शेखर को ताने कंज रहे हैं ।पिताजी सिम्मी के बारे में कहा रहा है -जब भी देखो सहेली ,सहेली,अमेरिका वाली सहेली के नाम ले कर हमें गुमराह तो नही कर रही है।आज शेखर को आ जाने दो सच्चाई उगलवा कर रहूंगा।माँ कहती है-
शेखर भला इंसान है ।
तुम्हारी बेटी का कोई चक्कर वक्कर तो नहीं चल हा है ।
मै क्या जानू
बेटी की तू माँ है दूसरे से भला कौन जानेगा
पिता जी कहते है-सिम्मी के मालिक आ कर निराश हो कर चला गया ।ये लड़की हम लोगो का नाक कटवायेगी।
शेखर थोड़ी तेज गति से बाइक चलाने लगे ।सिम्मी बहुत डरी हुई है।शेखर बाइक धीमी चलाओ
यैसे ही आज मरते मरते बची हुँ।घर जाते जिंदा रहूंगा या मरी हुई मन में सोच रही है।सिर में पट्टी बंधी हुई है ।दर्द भी है।जैसे घर पहुचते सिम्मी की होश उड़ गई।
बाबूजी,सिम्मी की इंतजार कर रही है ।मम्मी किचन में हैं।शेखर मुझे बहुत डर लग रहा है ।बाइक तुम साइड कर के स्टैंड में लगा देना ।मेरी बात सुनो मेरे ममी,पापा मुझे डांटेंगे तो मैं वेदांत के पास चली जाऊंगी।
सिम्मी के पिताजी शेखर को देखकर-आओ शेखर बेटा आने में देरी कर दी सिम्मी का रास्ता देखते देखते थक गया उनके मालिक नया सीएससी सेंटर खोलने जा रहें है ।उसका सरप्राइज देने इस गरीब के घर मे स्वमं चल कर आये थे।और उस सेंटर का मैनेजर सिम्मी को नियुक्त किया है।फिर सिम्मी पर नज़र जाता है ।
ये तेरे सिर में पट्टी कैसे बंधी है।शेखर कहता है-
मामूली चोट है बाबुजी अरे मार्केट में सीढ़ी चलते फिसल गई थी।
मां कहती है -देख कर चल नहीं सकती ,आज कल की लड़कियो की दिमाग किस जंगल मे घास चरने मसगुल रहती है ।
नहीं मां, शेखर ने तो बताया न।यही सच है।कितना बड़ा बंगला है ,नौकर चाकर सब काका की बात ही निराला है ।मुझे तो आने ही नहीं दे रहा था।उसके घर मे बहुत सकूंन है माँ ।
अरे तू किसकी बात कर रही है समझा नही ।
मां मेरी अमरिका वाली सहेली और शेखर भैया मिल कर नया बंगला बनवाएं हैं ।सादी इसी बंगले में होगा।मजा आ जायेगा।
उड़ मत बेटी ,अपना स्टेटस देख कर दोस्ती करना चाहिए।अमीर लोगों की तरह ब्यवहार नहीं किया करते ।उन लोगों की ईमान कब बदल जाए कोई नहीं जानता।
ऐसे नहीं होगा मम्मी,गरीब जरूर है हम बईमान नहीं।बात तुम से बहस करने से कोई मतलब नही है ।हल्दी वाला दुध गरमा गरम पी ले।चोट का दर्द ठीक हो जाएगा।बेटी तेरे कोहनियों में भी चोट ,और पांव में भी।तू सच सच बता तेरे साथ क्या हुआ है।इतना देरी तक तू कहां थी।
मम्मी कहा दिया न सहेली के यहाँ थी ।ये सब इशारा करता है ।तुम्हारा एक्ससीडेंट हुआ है।सिम्मी मां की बात सुन कर उसका दिल डर से धक से हो जाता है।शेखर ने झुठ क्यों बोला कि सीढ़ी से गिरी है।
मां आप से क्या झूठ बोलना मोनिक की मंगेतर
ने मेरी स्कूटी में अपना बाइक से टक्कर मार दिया।कौन मोनिका मैं नही जानती ।मां वही मोनिका वेदांत के फ़िल्म की हिरोइन है ।
तुझे वी आई पी रोड की ओर जाने की क्या जरूरत। वो तो वीआईपी रोड में रहता है ।
मां मुझ पर सक कर रही है ।वहीं तो नया सीएससी सेंटर खुल रहा है ।
भाई साहब बता रहे थे सिविल लाइन में खुलेगा।
वीआईपी और सिविल लाइन बड़े लोगो का इलाका है ।तू जानती होगी मां जहां वेदांत फ़िल्म के निर्माता,डायरेक्टर रहता है ।
बेटी तू उसे कैसे जानती है हमारे छत्तीसगढ़ के फेमस आदमी है और बहुत अच्छा सिनेमा बनाता है।एक एक सिनेमा घर मे तीन तीन चार चार महीने तक चलता है ।
मां ,मिला था वेदांत अस्पताल में ।बिचारा कितना सेवा किया ।ओ नहीं रहता तो मर गई होती।
चुप चुप असकुन बात नहीं करते। बड़े लोग है।डर लगता है बेटी उन लोगो से।
मां मैं मैनेजर नहीं बनूँगी।पुराना जगह अच्छा है।
क्यों ,
शेखर भैया का घर पास में है।
सिम्मी तुझे लड़के वालों के माँ बाप देखने आ रहे है ।
देख लिए तो हैं कितना बार देखेंगे।मुझे शादी नहीं करना है।उस खूसट से।बिजली विभाग में चपरासी है । मैं शादी वेदांत जैसे लड़के से करूँगा ।सिम्मी के पापा का आवाज आता है।सिम्मी के मम्मी अरे भाई खाना पीना खिलाओगे या अपने बेटी से बतियाते रहोगे। इधर सुन कल लड़के वाले दुबारा आ रहे है ।
उन लोगों को मना कर दीजिये क्यों कि सिम्मी चपरासी से शादी नहीं करेगी ।
अरे मुसकील से नौकरी वाला लड़का मिला है ।बिजली विभाग में सब से ज्यादा तनखा रहता है ।काला है तो क्या हुआ । बाद मे बाबू बन जायेगा ।
ठीक है प्रभु ,नए जमाने के बेटी से भी उसका मन जानना जरूरी है।
मैं कहा दिया रिश्ता पक्का ।मैं बड़े घराने के घर लड़का ढूंढने जाऊ ।
हम गरीब है ,बस रटते रहते हो।मैं यहां कितना दुख झेला है मेरा आत्मा जनता है।
लड़का अच्छा है 25 हजार तनखा है ।कम है क्या ।लड़का भी एक नम्बर ।और क्या चाहिए हम गरीबों के लिए।बाप भी चपरासी है कलेक्ट्रेड में सान होता है चपरासियों का।सिम्मी ने अपने मम्मी ,पापा के बात चीत परदे के आड़ से सुन लेती है ।और रोते हुए कमरे की ओर जाती है ।