Dhara - 10 in Hindi Love Stories by Jyoti Prajapati books and stories PDF | धारा - 10

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धारा - 10

"ये रहा गर्म दूध और ये दवाई..! खाकर सो जाओ ! अभी भी बुखार है तुम्हे !!!" देव को दवाई देकर धारा वापस किचन में आ गयी !

"धारा...प्लीज़ एक बार मेरी बात तो सुनो..!" उसके पीछे आते हुए देव रिक्वेस्ट करते हुए बोला ।

"देव प्लीज़.... इस समय मे कुछ भी सुनने-समझने की स्थिति में नही हूँ..!! आज के लिए प्लीज़ चुप रहो !" धारा ने बिना देव की ओर देखे एकदम निर्विकार भाव से कहा।

धारा की ये बेरुखी देव को बहुत चुभ रही थी। वो जानता त्या की उससे गलती हुई है ! मगर सज़ा देने की बजाय धारा उसे इग्नोर कर रही थी ! जो देव की बर्दाश्त सीमा से बाहर था।

देव ने फिर से हिम्मत कर धारा से बात करने की कोशिश की। " धारा, बस एक बार मुझे सफ़ाई देने का मौका तो दो..!! सुन तो लो मेरी बात !!"

धारा को गुस्सा आ गया ! वो बिना कुछ कहे ही जाने लगी ! देव ने उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचा और गुस्से में उसकी बाजुओं को पकड़कर बोला, "तुम समझती क्या हो खुद को..?? कब से माफी मांग रहा हूँ..! कुछ कहना चाह रहा हूँ मगर तुम्हे कोई फर्क ही नही पड़ रहा है !"

"हाँ... नही पड़ता मुझे कोई फर्क ! और ना ही तुम्हारी कोई बात सुनना है मुझे ! जस्ट लीव मी..!!" धारा खुद को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली।
देव की पकड़ मजबूत थी। उसने अबकी बार धारा से कुछ कहा नही ! बल्कि फिर से धारा को अपनी ओर खींचा और एक हाथसे उसके सिर को पीछे से पकड़ फिर से धारा के होठों पर किस कर दिया ! धारा को आंखे हैरानी से बड़ी हो गयी ! वो खुद को छुड़ाने के लिए बहुत देर तक कसमसाई मगर देव ने उसे नही छोड़ा। धारा की आंखों में आंसू आ गए ! जब देव ने उसे खुद से अलग किया तो वो बस देव को ही देखे जा रही थी।
धारा के चेहरे पर गुस्सा, नफरत, दर्द, ना जाने कितने ही भाव उभर रहे थे देव के प्रति !
वो आंखों से ही प्रश्न कर रही थी, "क्यों किया देव ऐसा..??"

देव धारा के चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच लेकर बड़े ही प्यार से बोला, " आई लव यू धारा..!! आई लव यू सो मच..!! जानता हूँ तुम्हारे मन मे हज़ारों सवाल होंगे ! जिनके जवाब शायद नही हैं मेरे पास ! पर मैं इतना जनता हूँ कि अब नही रह पाऊंगा तुम्हारे बिना ! आदत हो गयी है मुझे तुम्हारी ! तुम्हारी डाँट की, केअर की ! तुम्हारे अपनेपन की !!
धारा, अगर मेरी याददाश्त आ जाने के बाद यदि तुम मुझसे दूर चली जाओगी तो, नही करना मुझे कुछ भी याद ! जैसा हूँ वैसा ही अच्छा हूँ..!! हम वापस चलते हैं ना... इन सबसे दूर ! जहां हमारे अतीत का साया भी हम तक ना पहुंचे !!"

देव से ऐसी उम्मीद नही थी धारा को..!! देव अगर उससे प्यार करता भी है तो ऐसे कंफेशन करेगा ये तो उसने सोचा
ही नही था..!!!
धारा इस समय कुछ सोचने-समझने या बोलने की स्थिति से बिल्कुल बाहर थी...!!! देव से क्या कहे..?? किस तरह उसे समझाए..?? इसी उलझन में थी !!
देव अब भी धारा के जवाब के इंतजार में था की वो कब उसके प्यार का इज़हार करे और कब देव को गले लगाए..!! मगर धारा एकदम खामोश खड़ी रही !
जैसे किसी गहरे मंथन में डूबी हो..!! देव ने उसे झकोरा ! धारा वापस चेतना मे लौटी.!!

धारा ने देव की आंखों में देखा ! जहां उसके लिए उसे असीम प्रेम और विश्वास नज़र आ रहा था..! एक उम्मीद नज़र आ रही थी ! पर धारा को देव की ये उम्मीद और विश्वास तोड़ना था..!! अपने अतीत की परछाई को वो देव पर नही आने देना चाहती थी.!!!

अपने अतीत के बारे में सोचकर ही धारा की आंखे बंद हो जाती ! जैसे बहुत ही भयावह अतीत रहा हो उसका..!! जिसने उसका सबकुछ छीन लिया हो !

धारा ने अपने चेहरे से देव के हाथ हटाये और उससे बोली, " कहां जाना चाहते हो तुम सब छोड़कर...???"

धारा का हाथ पकड़ देव बोला, " कहीं भी धारा..जहां सिर्फ हम दोनो हो और हमारे अतीत से जुड़ी कोई चीज़ वहां ना हो..!!"

धारा, "ये तो असंभव है देव..!! हम चाहे सबसे पीछा छुड़ा लें.! लेकिन अपनी अतीत की यादों से पीछा कैसे छुड़ा सकते हैं..?? हम जहां भी जाएंगे, ये याद हमारे साथ हमारे अंतर्मन में ही रहेंगी और हमारे साथ ही चलेंगी..!!! तुम ये सब छोड़कर जाने की बात करते हो..? पर जाओगे कहाँ..??
है कोई ऐसी जगह जहां तुम्हे कोई पहचानने वाला ना हो..! जहां तुम्हारी जान को खतरा ना हो..!! इतना आसान नही है देव अपने अतीत से पीछा छुड़ाना..!! हम जितनी कोशिश करेंगे ना, ये यादें उतना ही हमे ज्यादा सताएंगी..!!!"

धारा ने जो भी कहा, उसका एक एक लफ्ज़ देव बड़े ही गौर से सुन रहा था ! क्योंकि धारा की कही हर बात में सच्चाई थी ! देव चाहकर भी विरोध नही कर पा रहा था !

धारा ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "अगर तुम्हें सब याद आ भी गया न देव...तो भी मैं तुमसे कभी प्यार कर ही नही पाऊंगी..!!"

देव के चेहरे पर उदासी छा गयी और आंखों में एक प्रश्न.,"क्यों..??"

धारा देव की मनोदशा को समझते हुए बोली, " मैंने अपने जीवन मे सिर्फ एक ही व्यक्ति से प्रेम किया है देव ! वो भी बेइन्तहा...!!! उसके अलावा मैं फिर कभी भी किसी से दोबारा प्यार नही कर पाऊंगी..!! अगर मैंने किसी को अपना भी लिया ना, तो भी उसके प्रेम के साथ न्याय नही कर पाऊंगी..!!"

धारा देव की ओर मुड़ते हुए बोली, "ये तो मेरे अतीत की बात है देव..!! क्या पता तुमने भी अपने अतीत में किसी से बेइंतहा मोहब्बत की हो..?? और वो लड़की तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हो..!! कब तुम उसके पास लौटोगे और कब उसकी प्रतीक्षा पूरी होगी..??"

देव ने मुंह फेरते हुए कहा, "मैं कहीं नही जाऊंगा...किसी के पास भी..!! मैं अब सिर्फ तुमसे प्यार करता हूँ..!!" देव ने ये बात इतनी मासूमियत से कही की धारा को उसपर जो गुस्सा आया था, सब काफूर हो गया।

धारा ने देव के कंधे पर हाथ रख उसके चेहरे को अपनी ओर घुमाया ! मगर देव बच्चो की तरह मुंह घुमाकर खड़ा हो गया ! धारा उसके सामने जाकर बोली, " इतनी नाराज़गी और ज़िद भी अच्छी नही है देव की जो दोस्ती है हमारी वो भी टूट जाये..!!"

धारा की इस धमकी ने देव को डरा दिया ! वो तुरंत धारा के गले लग कर बोला , "प्लीज़ यार ऐसा मत कहो..! तुमसे दूर जाने का खयाल भी डरा देता है..!! ठीक है तुम जो चाहती हो मैं वो करूँगा..!! पर प्लीज़...मुझे छोड़कर जाने की बात मत करना भूल से भी !!"

धारा ने महसूस किया देव कांप रहा है और उसका शरीर भी तप रहा है ! उसे फिर से बुखार चढ़ गया था ! धारा बहुत देर तक देव के गले लग उसकी पीठ सहलाती थी ! या शायद देव को विश्वास दिलाती रही कि, "डरो मत ! कहीं नही जा रही हूँ मैं ! यहीं हूँ तुम्हारे पास..!!!"

धारा ने देव से कहा, " देव तुमने दवाई ली..??"

देव ने इनकार में सिर हिलाया।

धारा ने देव से अलग हुई ! उसके लिए फिर से दूध गुनगुना किया और अंदर जाकर दवाई लेकर आई ! फिर अपने हाथों से देव को दवाई खिलाई ! देव ने भी बिना किसी बहस के चुपचाप एक समझदार बच्चे की तरह एक बार मे ही दवा ले ली !
धारा के होठों पर मुस्कान आ गयी ! उसे मुस्कुराते देख देव बोला, " तुम मुस्कुराते हुए बहुत अच्छी लगती हो..! ऐसे ही मुस्कुराती रहा करो मेरी जान..!!"

धारा, " देव.....

"शश्श....चुप..!! तुम चाहती हो ना कि मैं फिर से वही सब ना दोहराऊं..? तो ठीक है अब से मैं ऐसा कुछ नही करूँगा जिससे तुम्हे या मुझे शर्मिंदा होना पड़े ! पर जब तक हमारे अतीत कर बारे में पता नही चल जाता तब तक तुम मुझसे मेरे एकतरफा प्यार का अधिकार नहीं छीन सकती..!! वर्ना मैं दवाई, खाना-पीना, सब छोड़कर बिल्डिंग की टेरेस पर से छलांग लगाकर सुसाइड कर लूंगा..!!" देव ने एक क्लियर धमकी दे डाली थी धारा को ।

धारा मुंह खोले हतप्रभ सी देव को देखने लगी !

देव ने धारा के चेहरे को फिर हथेलियों में भरकर कहा, " आई स्वेर धारा एंड आई प्रॉमिस मैं कभी भी ना तो ऐसा कुछ कहूँगा या कुछ भी ऐसा करूँगा जिससे तुम्हे तकलीफ हो.!! क्योंकि तुम्हारी तकलीफ मेरी तकलीफ होगी..!! अब से मैं रोज़ समय से सारी दवाइयां लूंगा और वो सारे इंस्ट्रक्शन्स फॉलो करूँगा जो मेरे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं.!! जिससे मेरी याददाश्त जितनी जल्दी हो सके वापस आ जाये..!!! "

देव तो अपनी बात कह कर चला गया ! मगर धारा को एक कशमकश में उलझा गया ! धारा वहीं दीवार के सहारे से टिक कर बैठ गयी ! धारा के मन मे अभी भी प्रश्न उठा रहे थे कि "उसने तो कभी कुछ ऐसा किया ही नही जिससे देव के मन मे उसके लिए फीलिंग्स जागे..! ना ही कभी ऐसी कोई बात हुई दोनो के बीच.!! इतने समय मे आधे से ज्यादा समय तो वे दोनो एक दोस्त और उससे भी ज्यादा डॉक्टर पेशेंट के रूप में रहे !! फिर कैसे देव के मन मे प्रेम की भावनाएं जाग उठी..??"

धारा ने अपने दोनो हाथों से मुंह छुपा लिया ! आंखे बंद करते ही देव की मुस्कुराहट और मासूमियत भरी बातें दिखाई देने लगी..!!

अचानक ही सब धुंधला पड़ गया ! धारा बैचेन हो उठी ! "कहां गया देव..??" सबकुछ अंधेरे में मिल गया ! ना देव नज़र आ रहा था ना ही कुछ और...!!!

धारा ने डर की वजह से आंखे खोल ली ! अपने सीने पर हाथ रखा उसने ! धड़कने बढ़ी हुई सी प्रतीत हुई धारा को..!! सामान्य गति से कुछ ज्यादा ही तेज़ी से धड़क रहा था उसका दिल !!

धारा ने फिर से सीने पर हाथ रख आंखे बंद करते हुए एक बार ज़ोर से सांस ली !! उसकी बन्द पलकों के पीछे एकबार फिर से दिलकश मुस्कुराहट नज़र आयी उसे..!! इतनी प्यारी और निश्छल मुस्कान की धारा खो गयी उसमे..!! !
स्माइल करते समय होठों के नीचे पड़ने वाले डिंपल से और भी ज्यादा मादक हो गयी उस व्यक्ति की स्माइल ! जिसे धारा अपनी बन्द पलको के पीछे निहार रही थी !!

स्वतः ही धारा के होठों पर भी मुस्कुराहट आ गयी उसे देखकर..! और आंखों में आंसू ! जिसे बहने से बन्द पलकें भी ना रोक पाई !!

धारा सुबकते हुए बोली, "आई स्टिल लव यू...!! लव यू सो मच ! प्लीज़ लौट आओ ना...!!!"




क्रमशः