यह कहानी "टूटे तारे" एक छोटे बच्चे राज कुमार की है, जो चाय के ढाबे पर काम करता है। मुख्य पात्र, जो एक ऑफिस कर्मचारी है, एक दिन चाय पीते समय राज कुमार की दयनीय स्थिति को देखता है। राज कुमार गरीब है और ठंड में फटी शर्ट पहने हुए है। जब वह अपने भविष्य के सपनों के बारे में बताता है, तो यह पता चलता है कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है और वह स्कूल जाना चाहता है। कहानी में, मुख्य पात्र राज कुमार को सौ रुपये देता है ताकि वह स्वेटर खरीद सके। लेकिन जब वह कुछ समय बाद चाय के ढाबे पर लौटता है, तो उसे बताया जाता है कि राज कुमार को काम से निकाल दिया गया है। वह अब बीड़ी बनाने के कारखाने में काम कर रहा है। यह कहानी समाज की कठिनाइयों और छोटे बच्चों के सपनों को दर्शाती है, जो अपने हालात के बावजूद बेहतर भविष्य की उम्मीद रखते हैं।
टूटे तारे
by इशरत हिदायत ख़ान
in
Hindi Moral Stories
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Description
टूटे तारे. (लघु कथा) -ख़ान इशरत परवेज़"क्या लाऊँ, साहब?" बड़ी ही नम्रता से उसने पूछा. मैने सुबह के अखबार पर नज़र गड़ाए हुए ही कहा, "चाय.... एक चाय ले आओ, और हाँ, जरा कड़क रखना."वह फुर्ती से चला गया. कई घण्टे लगातार काम करने से उत्पन्न तनाव और दिसंबर की ठिठुरन के चलते मैं आफिस से निकलकर सीधा चाय के ढाबे पर ही आ बैठा था."साहब और कुछ चाहिए." कहकर उसने चाय का गिलास मुझे थमा दिया और केतली से जलता हाथ सहलाने लगा था. मैने अखबार बेंच के एक कोने
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