कहानी "आँख की किरकिरी" में विनोदिनी, जो कलकत्ता में अकेली है, अपने जीवन की कठिनाइयों और प्रेम को लेकर चिंतन करती है। महेन्द्र उसे एक डेरे पर छोड़कर गया है और वह अपने असहाय स्थिति को महसूस करती है। उसे यह समझ में आता है कि उसकी सुरक्षा और सहारा बिहारी ही दे सकता है, जबकि महेन्द्र के साथ रहना उसके लिए कठिनाई भरा है। विनोदिनी का प्रेम बिहारी के लिए अटूट है और वह उसे अपने मन में पूजा की तरह संजोए रखती है। वह सोचती है कि बिहारी को उसके प्रेम को स्वीकार करना होगा। उसकी आत्मा के लिए बिहारी ही एकमात्र सहारा है, और वह उसे छोड़ने का सोच भी नहीं सकती। विनोदिनी खिड़की से बाहर देखती है और सोचती है कि बिहारी अभी पास में है। उसके मन में उसके लिए अपार प्रेम और आकर्षण है, लेकिन वह अब अपने कार्यों के बारे में सोचने लगी है। इस कठिन स्थिति में, वह अपने प्रेम को पाने के लिए कोई उपाय ढूँढने की कोशिश करती है। चोखेर बाली - 6 by Rabindranath Tagore in Hindi Fiction Stories 22k 11.5k Downloads 24.5k Views Writen by Rabindranath Tagore Category Fiction Stories Read Full Story Download on Mobile Description रात को जब उसे पटलडाँगा के डेरे पर छोड़कर महेन्द्र अपने कपड़े और किताबें लाने घर चला गया, तो कलकत्ता के अविश्राम जन-स्रोत की हलचल में अकेली बैठी विनोदिनी अपनी बात सोचने लगी। दुनिया में पनाह की जगह काफी तो उसे कभी भी न थी, इतनी ज़रूर थी कि अगर एक ओर गरम हो जाए, तो दूसरी तरफ करवट बदलकर सो सके। आज लेकिन निर्भर करने की जगह निहायत सँकरी हो गई थी। जिस नाव पर सवार होकर वह प्रवाह में बह चली है, उसके दाएँ-बाएँ किसी भी तरफ ज़रा झुक जाने से पानी में गिर पड़ने की नौबत। लिहाज़ा बड़ी सावधानी से पतवार पकड़नी थी- ज़रा-सी चूक, ज़रा-सा हिलना-डुलना भी मुहाल। ऐसी हालत में भला किस औरत का कलेजा नहीं काँपता। पराये मन को मुट्ठी में रखने के लिए जिस चुहल की जरूरत है, जितनी ओट चाहिए, इस सँकरेपन में उसकी गुंजाइश कहाँ! महेन्द्र के एकबारगी आमने-सामने रहकर सारी जिंदगी बितानी पड़ेगी। फर्क इतना ही है कि महेन्द्र के किनारे लगने की गुंजाइश है, विनोदिनी के लिए वह भी नहीं। Novels चोखेर बाली विनोद की माँ हस्मिती महेन्द्र की माँ राजलक्ष्मी के पास जाकर धरना देने लगी। दोनों एक ही गाँव की थीं, छुटपन में साथ खेली थीं। राजलक्ष्मी महेन्द्र के पीछ... More Likes This शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई ( 1) by Ramesh Desai When Miracles Happen - 2 by fiza saifi I’m Not Fake, I’m Real - CHAPTER 1 by TEGICMATION किडनी का तोह्फ़ा - 1 by S Sinha वो आखिरी मुलाकात - 1 by veerraghawan Beyond the Pages - 1 by cat रूहों का सौदा - 1 by mamta More Interesting Options Hindi Short Stories Hindi Spiritual Stories Hindi Fiction Stories Hindi Motivational Stories Hindi Classic Stories Hindi Children Stories Hindi Comedy stories Hindi Magazine Hindi Poems Hindi Travel stories Hindi Women Focused Hindi Drama Hindi Love Stories Hindi Detective stories Hindi Moral Stories Hindi Adventure Stories Hindi Human Science Hindi Philosophy Hindi Health Hindi Biography Hindi Cooking Recipe Hindi Letter Hindi Horror Stories Hindi Film Reviews Hindi Mythological Stories Hindi Book Reviews Hindi Thriller Hindi Science-Fiction Hindi Business Hindi Sports Hindi Animals Hindi Astrology Hindi Science Hindi Anything Hindi Crime Stories