अस्पताल के बेड पर होंठो पर गुलाब की पंखुड़ियों सी फीकी मुस्कान के साथ रेवती बैठी थी। उसके चारों ओर उसके घर परिवार वाले इकठ्ठा थे। कानपुर से रेवती के माँ पापा और भाई भी आ चुके थे पापा की दुलारी रेवती को पापा बार बार बड़े प्यार से देखते और सर पर हाथ फेंर कर कहते मेरी रानी बिटिया को कुछ नही हुआ जल्दी ठीक हो जायेगी। वास्तव में रोड पर हुये चाकू कान्ड की वजह से रेवती का बहुत सा खून बह गया था वहाँ आस पास मौजूद लोगो ने अगर जरा सी भी संवेदनशीलता दिखाते हुये रेवती